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महात्मा गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ)

 

 महात्मा बुद्ध

गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) जिन्होंने अपने जीवन में बहुत सारे सुखो को छोड़कर दुनिया वालो को एक अपने Positive Thoughts विचारो से नया रास्ता दिखाने वाले भगवान गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) भारत के महान दार्शनिक, वैज्ञानिक, धर्मगुरु, एक महान समाज सुधारक और बौद्ध धर्म के संस्थापक थे, तो आएये अब हम महात्मा गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) उनके बारे में कुछ जानते है-

सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का जन्म (Gautam Buddha Birth Place) 563 ई पू में कपिलवस्तु के लुम्बनी नाम के जगह पर हुआ था | गौतम बुद्ध ने 29 साल की Age में अपने घर को छोडने के बाद सिद्धार्थ अनोमा नदी के तट पर अपने सिर को मुङवा कर भिक्षुओं का वस्त्र धारण किया।इस त्याग को बौद्ध धर्म में महाभि-निष्क्रमण कहा गया है।  गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन शाक्य कुल के राजा थे | गौतम बुद्ध की माँ मायादेवी की Death इनके जन्म के 7वे दिन ही होगी थी और इनका पालन इनकी मौसी  प्रजापति गौतमी ने किया था | घर छोड़ने के बाद गौतम बुद्ध सीधे वैशाली गए थे और यही पर गौतम बुद्ध ने अपने प्रथम गुरु आलारकलाम जी से शिक्षा ली थे |



 बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध ने की थी | गौतम बुद्ध के दूसरे गुरु का नाम "रूद्रकरामपुत्र"  था | ज्ञान प्राप्त होने के बाद सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के नाम से जाने गए | 16 Age की अवस्था में सिद्धार्थ का विवाह शाक्य कुल की कन्या यशोधरा से हुआ । यशोधरा का बौद्ध ग्रंथों में अन्य नाम बिम्ब, गोपा, भद्कच्छना भी मिलता है।

सिद्धार्थ से यशोधरा को एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसका नाम राहुल था।

गौतम बुद्ध ने अपना सबसे ज्यादा उपदेश या शिक्षा (shiksha) कौशल की राजधानी श्रावस्ती में दिया था | गौतम बुद्ध ने अपना सारा उपदेश जनसाधारण की भाषा पालि में दिया था | गौतम बुद्ध ने अपना सबसे पहला उपदेश सारनाथ में दिया था | जिसे बौध ग्रंथो में धर्मचक्र के नाम से पुकारा जाता है|

 इनके सबसे करीबी शिष्य बिम्विसार ,उदयन और प्रसेनजीत थे | गौतम बुद्ध की Death 80 साल की आयु में U.P. के देवरिया नामक स्थान पर हुई थी| जब सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो 4 चीजो को देखा था |

  • बूढा इन्सान (Old Human)
  • एक बीमार इन्सान (Seek Man)
  • शव (Dead Body)
  • एक सन्यासी (A monk)

बिना कुछ खाए-पिए 6 साल कठिन तपस्या के बाद 35 साल की Age में वैशाख की पूर्णिमा की रात पीपल(पीपल) वृक्ष के नीचे निरंजना (पुनपुन) नदी के तट पर सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी दिन से सिद्धार्थ तथागत कहलाये | ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए। उरुवेला से बुद्ध सारनाथ (ऋषि पत्तनम एवं मृगदाव) आये यहाँ पर उन्होंने पाँच ब्राह्मण संन्यासियों को अपना प्रथम उपदेश दिया, जिसे बौद्ध ग्रन्थों में धर्म – चक्र-प्रवर्तन नाम से जाना जाता है। बौद्ध संघ में प्रवेश सर्वप्रथम यहीं से प्रारंभ हुआ।


महात्मा बुद्ध ने तपस्या एवं काल्लिक नामक दो शूद्रों को बौद्ध धर्म का सर्वप्रथम अनुयायी बनाया। ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध के Death के बाद उनके शरीर को आठ भागो में बाटकर उनपर 8 स्तंभ बनाये गये थे | “विश्व दुखो से भरा है ” ये बात गौतम बुद्ध ने उपनिषद से लिया था | गौतम बुद्ध ने मध्यम मार्ग पर चलने का उपदेश दिया था |  गौतम बुद्ध की पहली मूर्ति मथुरा कला में बनाई गई थी |

बौद्ध धर्म के तीन रत्न है : बुद्ध,धम्म , संघ  जो लोग बौद्ध धर्म का प्रचार करते है, उनके भिक्षुक(Mendicant) कहा जाता है | बौद्ध धर्म के लोग पुनर्जन्म में विश्वास करते है |बौद्ध धर्म वालो ने सबसे ज्यादा मूर्ति का निर्माण गंधार शैली में किया है | बौद्ध धर्म के बारे में सबसे अच्छी जानकारी चाहते हैं तो बौद्ध धर्म  " पाली त्रिपिटक " पढ़ें |

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